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जीवन चक्र में वक्री ग्रह कैसे रखते हैं विशेष स्थान

पृथ्वी के स्थिर मानने पर सूर्य सापेक्ष रूप से पृथ्वी का चक्कर लगाता हुआ प्रतीत होता है और चंद्रमा तो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता ही रहता है, इसी कारण सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री गति से भ्रमण करते हुए प्रतीत नहीं होते हैं। राहु एवं केतु के काल्पनिक कटाव बिंदु हैं। चूंकि पृथ्वी एवं चंद्रमा अपनी-अपनी कक्षाओं में निर्धारित दिशा एवं गति से भ्रमण करते हैं

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जीवनसाथी का कैसे करें चुनाव

इस भाग-दौड़ की दुनिया में आधुनिकता, वैज्ञानिकता, तकनीकी सेंसर की चकाचैंध से परिपूर्ण इस विश्व में नवयुवक और नवयुवतियां अज्ञानता, अनभिज्ञता के अंधेरे में गुम होकर ऐसे कदम उठा लेते हैं जिससे उनका अनमोल जीवन नारकीय, कष्टप्रद और वीभत्स बन जाता है और बाद में पश्चात्ताप के अलावा उनके हाथ कुछ नहीं लगता। ऐसे में यदि हम ज्योतिष का सहारा लेकर जीवनसाथी का चुनाव करें तो हम अपने जीवन को सुखद एवं खुशहाल बना सकते हैं।

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टैरो: क्वीन आॅफ वांड्स

कार्ड मानइर आरकाना के सूट्स आॅफ वांड्स का नं. तीन फेस कार्ड है, यह कार्ड जिस व्यक्ति के लिये निकलता है उस व्यक्ति के व्यक्तित्व की सरलता को दर्शाता है। प्रस्तुत कार्ड का निकलना व्यक्ति के निश्छल प्यार व सहृदयता का प्रतीक है। अधिकांशतः यह कार्ड स्त्री चरित्र का प्रतिनिधित्व करता है लेकिन व्यावहारिक रूप से यह कार्ड पुरूष के लिये भी उसके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालता है।

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टेस्ट ट्यूब बेबी: एक ज्योतिषीय अध्ययन

आई. वी. एफ. यानि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक निःसंतान दंपत्तियों के लिए वरदान है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को इस तकनीक के जरिए महिला में कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। इस प्रक्रिया में गर्भाशय से बाहर, अर्थात इन विट्रो यानि कृत्रिम परिवेश में शुक्राणुओं द्वारा अंडकोशिकाओं का निषेचन किया जाता है। महिलाओं में बांझपन दूर करने की इस तकनीक में महिला के अंडाशय आई. वी. एफ. यानि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक निःसंतान दंपत्तियों के लिए वरदान है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को इस तकनीक के जरिए महिला में कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है।

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टाॅन्सिलाइटिस

टाॅन्सिलाइटिस एक बाल रोग है, जो बच्चों को बचपन में ही अपने शिकंजे में जकड़ लेता है। इसका मुख्य कारण गलत खान-पान होता है। अगर बड़े होने पर भी खान-पान गलत रहे, तो बड़े होकर भी यह रोग हो सकता है। जो बालक बचपन में अपने खान-पान का ध्यान नहीं रखते, खट्टी, तली और मसालेदार चीजों का उपयोग करते हैं, उन्हें टाॅन्सिलाइटिस रोग हो जाता है।

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टी. वी. से बाॅलीवुड तक के सफर के ज्योतिषीय योग

अब छोटा पर्दा बड़े से ज्यादा पीछे नहीं रह गया है। बड़े पर्दे के सितारों ने सिल्वर स्क्रीन से निकल कर जब से छोटे पर्दे पर एंट्री मारी है तबसे छोटे पर्दे की लोकप्रियता भी बढ़ गई है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि छोटे पर्दे के कलाकार भी लोगों के बीच उतने ही लोकप्रिय हो रहे हैं जितने कि बड़े पर्दे के कलाकार। वहीं टेलीविजन की दुनिया के कई सितारे ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने आगे चलकर बॉलीवुड की फिल्मों में काम किया और ये सिलसिला आज से नहीं बल्कि सालों पहले से चलता आ रहा है कि छोटे पर्दे के कलाकार बड़े पर्दे पर और बड़े पर्दे के कलाकार छोटे पर्दे पर आते रहते हैं। जानकर हैरानी होगी कि ऐसी ही अभिनेत्रियों में विद्या बालन का नाम भी शामिल है जो इन दिनों बॉलीवुड में धमाल मचा रही हैं।

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टोटके

परीक्षा में सफलता: छात्र यदि निम्न उपाय करेंगे तो अवश्य ही सफलता उनके कदम चूमेगी। परीक्षा से एक महीने पूर्व प्रातः बुधवार को नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पास में जहां भी गणपति या सरस्वती का मंदिर हो वहां गुलाब की अगरबत्ती, धूप-दीप जलाएं, पूर्व मुख बैठंे और मूंगे की माला पर निम्न मंत्र का जाप पांच माला करें: